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पैरों में अचानक सूजन: कहीं यह नसों में खून के कतरों का जमाव तो नहीं...
अचानक पैर में सूजन, गरà¥à¤®à¤¾à¤¹à¤Ÿ और चलने - फिरने पर पैर में खिंचाव जैसे लकà¥à¤·à¤£ डीप वेन थà¥à¤°à¥‹à¤®à¥à¤¬à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ (डीवीटी) यानी पैरों की नसों में खून के कतरों का जमाव नामक गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के सूचक हो सकते हैं। सही इलाज मिलने के कारण डीवीटी बीमारी गंà¤à¥€à¤° हो जाती है। रोगी की जान खतरे में पड़ सकती है। वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करना और महिलाओं में गरà¥à¤à¤¨à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• दवाओं à¤à¤µà¤‚ हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ के बà¥à¤¤à¥‡ सेवन के कारण डीवीटी बà¥à¤¨à¥‡ लगती है। हाई हील सैंडल पहनने से à¤à¥€ बीमारी का खतरा बà¥à¤¤à¤¾ है। इसके अलावा फेफड़े, या आंतों का कैंसर होने या किसी बीमारी के कारण खून का जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गाà¥à¤¾ हो जाने पर à¤à¥€ यह रोग हो सकता है।
पैर या हाथों की वेनà¥à¤¸ आॅकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ रहित गंदे खून को इकटà¥â€Œà¤ ा करके हृदय की ओर ले जाती है। वहां से अशà¥à¤¦à¥à¤§ रकà¥à¤¤ शà¥à¤¦à¥à¤§ होने के लिठफेफड़े में जाता है। कई बार में खून के कतरे इन वेनà¥à¤¸ में जमा होकर रकà¥à¤¤ के बहाव को रोक देते हैं। इससे वेनà¥à¤¸ जाम हो जाती हैं, जिसके कारण पैर या हाथ में सूजन आने लगती है। गंदे रकà¥à¤¤ के अलावा शरीर का पानी और इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¸ à¤à¤‚व खनिज जैसे जरूरी अवयव à¤à¥€ जमा हो जाते हैं। इससे वेनà¥à¤¸ में टिशà¥à¤¯à¥‚ पà¥à¤°à¥ˆà¤¶à¤° बॠजाता हैं। इससे शà¥à¤¦à¥à¤§ रकà¥à¤¤ ले जाने वाली रकà¥à¤¤ धमनियों का बहाव रà¥à¤• जाता है। इससे पैर अथवा हाथ काले पड़ने लगते हैं और गैंगरीन नामक à¤à¤‚यकर अवसà¥à¤¥à¤¾ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ हो जाती है।रोग का सही वकà¥à¤¤ पर इलाज होने या गलत इलाज, लापरवाही बरतने और आराम करने पर वेनà¥à¤¸ में इकटà¥â€Œà¤ े हà¥à¤ रकà¥à¤¤ के कतरे दिल से होकर फेफड़े की नली में इकटà¥â€Œà¤ ा होने लगते हैं। इससे पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ इमà¥à¤¬à¥‹à¤²à¤¿à¤œà¥à¤® की अतà¥à¤¯à¤‚त जानलेवा सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पैदा होती है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मरीज की सांस फूलने लगती है। रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª नीचे गिर जाता है।
डीवीटी के मरीजों को आमतौर पर खून की नस के जरिठरकà¥à¤¤ को पतला करने वाली दवाà¤à¤‚ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में दी जाती हैं, लेकिन जब मरीज में पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ इमà¥à¤¬à¥‹à¤²à¤¿à¤œà¥à¤® की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ हो जाठतो थà¥à¤°à¥‹à¤®à¥à¤¬à¥‹à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤• थैरेपी दी जाती हैै। à¤à¤¸à¥‡ रोगियों के लिठअतà¥à¤¯à¤¾à¤§à¥à¤¨à¤¿à¤• उपकरणों वाले आईसीयू की जरूरत होती है। यह बीमारी तब खतरनाक रूप ले लेती है जब रोग से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ पैर के खराब होने की आशंका बॠजाà¤à¥¤ à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में ततà¥à¤•ाल वेनà¥à¤¸ थà¥à¤°à¥‹à¤®à¥à¤¬à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤®à¥€ आॅपरेशन की जरूरत पड़ती है। इस आॅपरेशन में मोटी वेनà¥à¤¸ को खोल कर खून के कतरे निकाल दिठजाते है और धमनी को वेनà¥à¤¸ से जोड़कर धमनियों का शà¥à¤¦à¥à¤§ रकà¥à¤¤ शिराओं में डाला जाता है। पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ इमà¥à¤¬à¥‹à¤²à¤¿à¤œà¥à¤® की कà¥à¤› विशेष परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में पेट की मोटी à¤à¤‚व मà¥à¤–à¥à¤¯ वेनà¥à¤¸ में à¤à¤¨à¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ या आॅपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के जरिठआईवीसी फिलà¥à¤Ÿà¤° डाला जाता है, जिससे पैर की वेनà¥à¤¸ में जमे खून के कतरे पेट की वेनà¥à¤¸ में रà¥à¤• जाà¤à¤‚ और दिल के जरिठफेफड़े तक पहà¥à¤‚चे। डीवीटी के काफी मरीजों में इसके इलाज के बावजूद पोसà¥à¤Ÿ थà¥à¤°à¥‹à¤®à¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤Ÿà¤¿à¤• सिनà¥à¤¡à¥à¤°à¥‹à¤® होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बनी रहती है। इसमें वेनà¥à¤¸ के वालà¥à¤µ कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हो जाते हैं। à¤à¤¸à¥‡ मरीजों को उमà¥à¤°à¤à¤° वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करना चाहिà¤, ताकि आगे चलकर उनमें वेरिकोस वेनà¥à¤¸, और वेरिकोस अलà¥à¤¸à¤° उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो।बीमारी की रोकथाम के लिठरोज तीन से चार किलोमीटर सैर करने तथा पैरों की कसरत करने से पैरों की वेनà¥à¤¸ में आॅकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ रहित गंदे रकà¥à¤¤ को रà¥à¤•ने का मौका नहीं मिलता और मांसपेशियों का पमà¥à¤ª अचà¥à¤›à¥€ तरह काम करता हैं। लंबे समय तक बेडरेसà¥à¤Ÿ में रहने वालों, कैंसर लकवा के मरीजों, नवजात शिशà¥à¤“ं की माताओं तथा गरà¥à¤ निरोधक गोलियों à¤à¤µà¤‚ हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ का सेवन करने वाली महिलाओं को सावधान रहना चाहिà¤à¥¤
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